मिट्टी, लकड़ी और रंगों से रची पहचान: कमल किशोर रस्तोगी की कला-यात्रा
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31 Aug 2026
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Short Description
तीन दशकों से अधिक समय से मूर्तिकला, चित्रकला और वुड कार्विंग के क्षेत्र में निरंतर साधना कर रहे कमल किशोर रस्तोगी ने अपनी कला के माध्यम से देश-विदेश में पहचान बनाई। उनकी यात्रा बताती है कि निरंतर अभ्यास, समर्पण और अपनी कला के प्रति जुनून व्यक्ति को एक अलग मुकाम तक पहुँचा सकता है।
Success Story
हर व्यक्ति के भीतर कोई न कोई प्रतिभा छिपी होती है। लेकिन उस प्रतिभा को पहचानना, उसे लगातार निखारना और वर्षों तक पूरी लगन के साथ उसके प्रति समर्पित रहना ही उसे उपलब्धि में बदलता है।
कमल किशोर रस्तोगी की कहानी इसी निरंतर साधना, रचनात्मकता और समर्पण की कहानी है।
एक पेशेवर भारतीय मूर्तिकार, चित्रकार और विजुअल आर्टिस्ट, कमल किशोर रस्तोगी पिछले तीन दशकों से अधिक समय से कला के क्षेत्र में सक्रिय हैं। उनकी कला की यात्रा मूर्तिकला, चित्रकला, लकड़ी पर नक्काशी और सार्वजनिक कला जैसे विभिन्न माध्यमों से होकर गुजरती है।
उनकी कला में भारतीय सांस्कृतिक विरासत की गहरी छाप दिखाई देती है, जिसे वे समकालीन अभिव्यक्ति के साथ जोड़ते हैं। उनकी रचनात्मक यात्रा यह दर्शाती है कि परंपरा और आधुनिक सोच को साथ लेकर भी एक कलाकार अपनी विशिष्ट पहचान बना सकता है।
शिक्षा से मजबूत हुई कला की नींव
कमल किशोर रस्तोगी ने अपनी कला शिक्षा को गंभीरता से आगे बढ़ाया और विभिन्न औपचारिक पाठ्यक्रमों के माध्यम से अपनी कला की नींव मजबूत की।
उन्होंने D.A.V. College, Bareilly से वर्ष 1993 में I.G.D. Diploma प्राप्त किया।
इसके बाद उन्होंने Rohilkhand University, Bareilly से:
वर्ष 1997 में B.A. in Drawing & Painting – First Division
वर्ष 2000 में Diploma in Sculpture
वर्ष 2000 में M.A. in Drawing & Painting – First Division
प्राप्त किया।
कला के प्रति उनकी निरंतर सीखने की इच्छा ने उन्हें केवल एक माध्यम तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने चित्रकला के साथ-साथ मूर्तिकला और लकड़ी पर नक्काशी जैसे माध्यमों में भी अपनी रचनात्मक क्षमता को विकसित किया।
कला से सार्वजनिक पहचान तक
कमल किशोर रस्तोगी की कला केवल स्टूडियो या गैलरी तक सीमित नहीं रही।
उनकी कई महत्वपूर्ण कलाकृतियाँ सार्वजनिक स्थानों और संस्थानों में स्थापित हैं।
नई दिल्ली के Preet Vihar में उनकी बनाई स्वामी विवेकानंद की सार्वजनिक प्रतिमा स्थायी रूप से स्थापित है।
इसी प्रकार उत्तर प्रदेश के Ghaziabad के Vaishali में उनकी बनाई चंद्रशेखर आज़ाद की सार्वजनिक प्रतिमा भी स्थायी रूप से स्थापित है।
उनकी एक figurative sculpture Dubai, United Arab Emirates में भी स्थायी रूप से स्थापित की गई है।
यह उपलब्धियाँ इस बात का प्रमाण हैं कि वर्षों की कला-साधना ने उनकी रचनात्मकता को सार्वजनिक स्तर पर भी पहचान दिलाई।
देश की प्रतिष्ठित कला संस्थाओं के साथ सहभागिता
कमल किशोर रस्तोगी की कला-यात्रा में देश की कई प्रतिष्ठित कला एवं सांस्कृतिक संस्थाओं के साथ सहभागिता भी रही है।
उनका कार्य और सहभागिता Lalit Kala Akademi, Indian Council for Cultural Relations (ICCR), National Gallery of Modern Art (NGMA) सहित विभिन्न सांस्कृतिक एवं शैक्षणिक संस्थानों से जुड़ी रही है।
वर्ष 2024 में उन्होंने National Gallery of Modern Art (NGMA) और Lalit Kala Akademi द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित Viksit Bharat Ambassador Artists' Workshop में भाग लिया।
उन्होंने विभिन्न राष्ट्रीय कला शिविरों, workshops और exhibitions में भी सहभागिता की है।
प्रदर्शनियों की लंबी यात्रा
एक कलाकार के लिए अपनी कला को लोगों के सामने प्रस्तुत करना उसकी यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है।
कमल किशोर रस्तोगी ने कई Solo Exhibitions और Group Exhibitions में अपनी कला प्रस्तुत की।
उनकी प्रमुख Solo Exhibitions में:
ICCR Art Gallery, New Delhi – 2012
Press Club Art Gallery, New Delhi – 2007
Kargil Heroes को समर्पित Solo Exhibition – Lucknow, 1999
भारत की स्वतंत्रता की 50वीं वर्षगांठ के अवसर पर Solo Exhibition – Rampur, 1997
शामिल हैं।
उन्होंने Lalit Kala Akademi, Rabindra Bhavan, New Delhi में भी Group Exhibitions में भाग लिया, जिनमें वर्ष 2023 का MODI @20 Group Exhibition भी शामिल है।
उनकी कला यात्रा Bengaluru, Lucknow और अन्य स्थानों की exhibitions तक भी पहुँची।
कला शिविरों और कार्यशालाओं में सक्रिय सहभागिता
कमल किशोर रस्तोगी की यात्रा केवल अपनी कला बनाने तक सीमित नहीं रही। उन्होंने देश के विभिन्न हिस्सों में आयोजित art camps और workshops में भी सक्रिय रूप से भाग लिया।
उनकी सहभागिता में:
Rampur Raza Library में "Maryada Ke Path-Pradarshak Ram" Art Exhibition & Interactive Session – 2025
Viksit Bharat Ambassador Artists' Workshop – 2024
All India Artists' Camp, Surajkund International Crafts Mela – 2024
"Vividhtaon Mein Ram" Art Camp – 2023
Lalit Kala Online Art Camp – 2021
Atal Art Camp – 2020
Wood Carving Sculpture Camp, Udaipur – 2018
Wood Carving Sculpture Camp, Chandigarh – 2017
Annual Art Camp, IFACS, New Delhi – 2017
जैसे महत्वपूर्ण आयोजन शामिल हैं।
सम्मान और पहचान
किसी कलाकार के लिए सम्मान केवल पुरस्कार नहीं होते, बल्कि वर्षों की मेहनत और रचनात्मक योगदान की पहचान भी होते हैं।
कमल किशोर रस्तोगी को वर्ष 2014 में Bhanu Pratap Shukla Smriti Samman से सम्मानित किया गया।
इसके अतिरिक्त वर्ष 2008 में Amity International School, New Delhi की Painting Competition में उन्होंने विजेता का सम्मान प्राप्त किया।
कला के साथ नई पीढ़ी से जुड़ाव
कमल किशोर रस्तोगी की कला-यात्रा का एक महत्वपूर्ण पहलू उनका professional participation और jury roles भी है।
उन्होंने Arty Fine Arts, Noida की Art Competition Panel में Jury Member के रूप में भूमिका निभाई है।
इसके अलावा Rotary Club, Bareilly द्वारा आयोजित Children's Painting Competition में भी उन्होंने Jury Member के रूप में योगदान दिया।
यह उनके अनुभव और कला की समझ को अगली पीढ़ी तक पहुँचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण योगदान है।
राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान
तीन दशकों से अधिक की निरंतर कला-साधना ने कमल किशोर रस्तोगी की कला को देश की सीमाओं से आगे भी पहुँचाया है।
उनकी कलाकृतियाँ public, government, university और private collections में भारत तथा विदेशों में मौजूद हैं।
Rohilkhand University, Bareilly के permanent collection में भी उनके paintings शामिल हैं।
उनकी कला को विभिन्न प्रतिष्ठित व्यक्तियों और संस्थानों तक पहुँचने का अवसर मिला है तथा उनके sculptural works कई distinguished public figures को प्रस्तुत किए गए हैं।
युवाओं के लिए प्रेरणा
कमल किशोर रस्तोगी की यात्रा हमारे समाज के युवाओं के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश देती है।
आज के समय में युवा अक्सर सफलता का परिणाम जल्दी देखना चाहते हैं। लेकिन कला जैसे क्षेत्र में पहचान बनाने के लिए वर्षों की मेहनत, निरंतर अभ्यास, सीखने की इच्छा और धैर्य की आवश्यकता होती है।
कमल किशोर रस्तोगी की तीन दशकों से अधिक की यात्रा यह बताती है कि किसी भी प्रतिभा को सफलता में बदलने के लिए निरंतरता सबसे महत्वपूर्ण है।
उन्होंने एक ही दिशा में लंबे समय तक काम करते हुए अपनी कला को अलग-अलग माध्यमों में विकसित किया और अपनी रचनात्मक पहचान बनाई।
उनकी यात्रा से युवा यह सीख सकते हैं कि—
अपनी प्रतिभा को पहचानिए।
अपने हुनर को समय दीजिए।
लगातार सीखते रहिए।
और अपने लक्ष्य के प्रति वर्षों तक समर्पित रहिए।
क्योंकि बड़ी उपलब्धियाँ हमेशा एक दिन में नहीं बनतीं।
वे वर्षों की छोटी-छोटी कोशिशों, अनुशासन और समर्पण से आकार लेती हैं।
कमल किशोर रस्तोगी की कहानी इसी निरंतर साधना का एक सुंदर उदाहरण है—जहाँ देखने की कला, कल्पना, मेहनत और हाथों का हुनर मिलकर ऐसी रचनाएँ बनाते हैं जो लोगों और स्थानों की स्थायी पहचान का हिस्सा बन जाती हैं।
“प्रतिभा शुरुआत हो सकती है, लेकिन निरंतर साधना ही प्रतिभा को पहचान में बदलती है।”
स्वर्णकार श्रेष्ठ फाउंडेशन परिवार की ओर से श्री कमल किशोर रस्तोगी को उनकी कला-साधना, उपलब्धियों और रचनात्मक योगदान के लिए हार्दिक शुभकामनाएँ। उनकी तीन दशकों से अधिक की यात्रा हमारे समाज के युवाओं को अपनी प्रतिभा पहचानने, अपने हुनर को निखारने और अपने क्षेत्र में निरंतर मेहनत करते हुए अपनी अलग पहचान बनाने के लिए प्रेरित करती रहे।
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