दिव्यांगता को पीछे छोड़ डिप्टी कलेक्टर तक का सफर तय किया हिमांशु सोनी ने
Community Achievement
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Short Description
जबलपुर के हिमांशु सोनी की प्रेरणादायक सफलता की कहानी, जिन्होंने शारीरिक चुनौतियों को पीछे छोड़कर MPPSC में दिव्यांग वर्ग में प्रथम स्थान और ओवरऑल 13वीं रैंक हासिल कर डिप्टी कलेक्टर बनने का गौरव प्राप्त किया।
Success Story
संघर्ष चाहे कितना भी कठिन क्यों न हो, यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और हौसले मजबूत हों, तो कोई भी बाधा मंजिल तक पहुंचने से नहीं रोक सकती। जबलपुर के हिमांशु सोनी की कहानी इसी विश्वास को साकार करती है।
हिमांशु सोनी ने अपने जीवन में शारीरिक चुनौतियों का सामना करते हुए भी शिक्षा और अपने सपनों से कभी समझौता नहीं किया। रोजमर्रा के कार्यों में व्हीलचेयर और परिवार के सहयोग की आवश्यकता होने के बावजूद उन्होंने अपनी परिस्थितियों को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। इसके विपरीत, उन्होंने इन्हीं परिस्थितियों को अपनी इच्छाशक्ति और आत्मविश्वास को मजबूत करने का माध्यम बनाया।
हिमांशु का लक्ष्य स्पष्ट था—डिप्टी कलेक्टर बनना। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए उन्होंने निरंतर अध्ययन, अनुशासन और मेहनत को अपना आधार बनाया। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार उन्होंने घर से ऑनलाइन माध्यम से MPPSC की तैयारी की और सीमित परिस्थितियों में भी अपनी तैयारी को लगातार जारी रखा।
उनके संघर्ष की सबसे कठिन घड़ियों में से एक MPPSC साक्षात्कार से ठीक पहले आई। 19 अगस्त 2025 को वे बाथरूम में फिसल गए, जिससे उनके हाथ में गंभीर फ्रैक्चर हुआ और 23 अगस्त को उनकी सर्जरी हुई। कुछ ही दिनों बाद उनका साक्षात्कार निर्धारित था। शारीरिक स्थिति ऐसी थी कि सामान्य तरीके से साक्षात्कार देना बेहद कठिन था। एक समय उन्होंने साक्षात्कार छोड़ने का विचार भी किया, लेकिन परिवार, विशेषकर उनके पिता के प्रोत्साहन ने उन्हें आगे बढ़ने की ताकत दी।
इसके बाद हिमांशु एम्बुलेंस से साक्षात्कार स्थल तक पहुंचे। उनकी परिस्थिति को देखते हुए आयोग के अधिकारियों ने एम्बुलेंस में ही उनका साक्षात्कार लिया। कठिन परिस्थितियों के बावजूद हिमांशु ने आत्मविश्वास बनाए रखा और साक्षात्कार में हिस्सा लिया।
उनकी मेहनत और दृढ़ इच्छाशक्ति का परिणाम MPPSC 2024 के परिणाम में सामने आया। हिमांशु सोनी ने दिव्यांग वर्ग में प्रथम स्थान और ओवरऑल 13वीं रैंक हासिल की और उनका चयन डिप्टी कलेक्टर पद के लिए हुआ।
लेकिन हिमांशु की सफलता केवल एक प्रतियोगी परीक्षा पास करने की कहानी नहीं है। यह कहानी उन सभी युवाओं के लिए संदेश है जो किसी कठिन परिस्थिति, असफलता या संसाधनों की कमी के कारण अपने सपनों को अधूरा मान लेते हैं।
उनकी यात्रा हमें सिखाती है कि—
परिस्थितियां हमारे रास्ते को कठिन बना सकती हैं, लेकिन हमारी मंजिल तय नहीं कर सकतीं।
असफलता अंत नहीं है, बल्कि बेहतर तैयारी की शुरुआत है।
सफलता के लिए सबसे जरूरी है—स्पष्ट लक्ष्य, निरंतर मेहनत, आत्मविश्वास और कभी हार न मानने का संकल्प।
हिमांशु सोनी अपनी सफलता का श्रेय अपने परिवार के सहयोग और स्वयं के आत्मविश्वास को देते हैं। उन्होंने यह भी व्यक्त किया है कि वे प्रशासनिक सेवा के माध्यम से समाज की सेवा करना चाहते हैं और विशेष रूप से दिव्यांगजनों के लिए बेहतर सुविधाओं की दिशा में काम करने की इच्छा रखते हैं।
समाज के युवाओं के लिए संदेश
हिमांशु सोनी की कहानी हमारे समाज के प्रत्येक युवा को यह संदेश देती है कि सपने देखने के लिए परिस्थितियों का अनुकूल होना जरूरी नहीं है। जरूरी है कि हम अपने लक्ष्य पर विश्वास रखें और हर कठिन परिस्थिति के बावजूद आगे बढ़ते रहें।
जहाँ इच्छा होती है, वहाँ रास्ते निकलते हैं; और जहाँ हौसला होता है, वहाँ मंजिल दूर नहीं रहती।
हिमांशु सोनी की उपलब्धि पूरे समाज के लिए गर्व का विषय है और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण है।
स्वर्णकार श्रेष्ठ फाउंडेशन परिवार की ओर से श्री हिमांशु सोनी को उनकी इस प्रेरणादायक उपलब्धि के लिए हार्दिक बधाई एवं उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएँ।
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